सोमवार 12 अक्टूबर को जारी आँकड़ों के मुताबिक़ सितम्बर 2026 में खुदरा महंगाई दर 5.54 फीसदी दर्ज की गई। अगस्त 2026 में यह 4.83 फीसदी थी। यह स्तर अक्टूबर 2024 के बाद सबसे ऊँचा है और बाज़ार के अनुमानों से ऊपर रहा।
आँकड़े क्या कहते हैं
- सितम्बर सीपीआई: 5.54 फीसदी (आधार: अगस्त 4.83 फीसदी)
- रिलीज़: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एमओएसपीआई)
- आरबीआई की सहमात्रा का ऊपरी छोर 6 फीसदी है
महंगाई के इस स्तर पर मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद चर्चा तेज़ हो गई है। 5 से 7 अक्टूबर के एमपीसी सत्र में रेपो दर 5.50 फीसदी तक ले जाए गई और चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 7.1 फीसदी तथा सीपीआई अनुमान 5.2 फीसदी रखा गया।
खाद्य पदार्थों की कीमतों में मौसमी तेज़ी और पेट्रोल-डीज़ल के प्रभाव को मुख्य कारण बताया गया। विश्लेषकों का तर्क है कि अगर अक्टूबर-नवम्बर के आँकड़े भी ऊँचे रहे तो बैंक को दबाव झेलना पड़ सकता है।
ग़रीब परिवारों के लिए सबसे बड़ा असर भोजन और ईंधन की कीमतों से आता है, इसलिए सरकार की ओर से आपूर्ति-प्रबंधन और निर्यातबंध जैसे उपाय भी चर्चा में हैं।
स्रोत: रॉयटर्स, एमओएसपीआई का सीपीआई डेटा, आरबीआई का मौद्रिक नीति रिपोर्ट।


