उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को यीस बैंक के उस क़दम को अवैध करार दिया, जिसमें मार्च 2020 में बैंक के पुनर्गठन के दौरान 8,415 करोड़ रुपये मूल्य की एटी-1 (एडिशनल टियर-1) बॉन्ड का पूर्ण राइट-ऑफ़ किया गया था। कोर्ट ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश को भी बरक़रार रखा।

यीस बैंक का पुनर्गठन तब किया गया जब रिज़र्व बैंक की पहल पर एसबीआई के नेतृत्व वाले कंसोर्शियम में बैंक का विलय कराया गया। उसी प्रक्रिया के दौरान एटी-1 बॉन्ड होल्डर्स की पूंजी को शून्य घोषित कर दिया गया था, जिसके ख़िलाफ़ बॉन्डधारकों ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था।

कोर्ट की नज़र में क्या तय हुआ

सुनवाई के दौरान देखा गया कि बॉन्ड पर लिखे जाने के लिए एग्रीमेंट में तय की गई "ट्रिगर ईवेंट" वाली शर्तें पूरी नहीं हुई थीं। कोर्ट के अनुसार, ज़रूरी घटना घटे बिना बॉन्ड को ज़ीरो करना अनुबंध के उल्लंघन के दायरे में आता है।

  • राइट-ऑफ़ की गई रक़म: 8,415 करोड़ रुपये (क़रीब 880 करोड़ डॉलर)
  • मामला यीस बैंक पुनर्गठन, मार्च 2020 से जुड़ा है
  • बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश को शीर्ष अदालत ने सही ठहराया

बैंक ने कहा है कि वह फैसले का अध्ययन कर रहा है और आगे के क़ानूनी विकल्प देखे जा रहे हैं। बाज़ार में इस ख़बर के बाद गुरुवार के कारोबार में यीस बैंक के शेयरों में क़रीब तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

विश्लेषकों का कहना है कि फ़ैसला क़ानूनी तौर पर स्पष्ट है, लेकिन बैंक की पूंजी के लिहाज़ से यह एक नई चिंता है, क्योंकि एटी-1 बॉन्ड बैंकों की टियर-1 पूंजी का हिस्सा माने जाते हैं।

स्रोत: रॉयटर्स, इकनॉमिक टाइम्स, मनीकंट्रोल; आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी कोर्ट की रिपोर्टिंग से।