दिल्ली में विशेष केंद्रित रजिस्टर (एसआईआर) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ चल रहा विरोध इस सप्ताह भी जारी रहा। 10 अक्टूबर को प्रदर्शन से पहले राजधानी में व्यापक बंदोबस्त लगाया गया था और जनपथ पर धरने की अनुमति नहीं दी गई थी।
अदालत और हिरासत
14 अक्टूबर को सिटिज़ेंस फ़ॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के सौरव दास और आशुतोष रंका को जनपथ पर कथित अतिक्रमण के लिए पाँच दिन की न्यायिक हिरासत की सज़ा सुनाई गई। जनपथ अब अधिसूचित प्रदर्शन स्थल नहीं रहा है।
16 अक्टूबर को 'तिरंगा मार्च' के लिए जा रहे अभिजीत दिपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की नेहा बोरा को रोका गया। 17 अक्टूबर को एक स्थानीय अदालत ने दिपके को शर्तों के साथ ज़मानत दी।
- 10 अक्टूबर: जनपथ पर धरने की अनुमति नहीं, इलाक़े में नाकेबंदी
- 14 अक्टूबर: दो सीजेपी नेताओं को पाँच दिन की हिरासत
- 16 अक्टूबर: दिपके और बोरा को मार्च से पहले रोका गया
- 17 अक्टूबर: दिपके को शर्तों के साथ ज़मानत
विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जेडी(यू) की ओर दर्ज शिकायत वापस लेने की अपील की, जबकि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने विपक्ष पर एसआईआर के विरोध को राजनीतिक एजेंडा बताने का आरोप लगाया।
मानवाधिकार संगठन ऐम्नेस्टी इंटरनेशनल ने 9 अक्टूबर के बयान में कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध पर सुगम मार्ग दिया जाना चाहिए, न कि राजधानी में बंदोबस्त जैसी पाबंदियां लगानी चाहिए।
स्रोत: बीबीसी, द हिंदू लाइव अपडेट, ऐम्नेस्टी इंटरनेशनल, न्यू इंडियन एक्सप्रेस।


