केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने कहा कि अमरीका के साथ चल रहे वाणिज्यिक समझौते का पहला हिस्सा "अंतिम रूप" दिया जा चुका है और अब क़ानूनी भाषा तैयार की जा रही है। बयान 15 अक्टूबर को आया।

क्या पता चला

  • अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिएसन ग्रीर ने कहा कि "बड़े मुद्दे" तय हो चुके हैं
  • किसी शुल्क-प्रतिशत या क्षेत्र-सूची की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई
  • गोयल ने कहा कि भारत-ईयू समझौता दिसम्बर में हस्ताक्षरित होने की संभावना
  • यूके और कनाडा के वाणिज्य मंत्री भारत आने वाले हैं

दोनों देशों के बीच बातचीत शुल्क, बाज़ार-पहुँच और मूल-उत्पत्ति नियमों पर केंद्रित रही है। भारत की चिंता कृषि और डेयरी संवेदनशीलता को लेकर रही है, जबकि अमरीका की नज़र औद्योगिक उपकरणों और डिजिटल व्यापार पर है।

निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा सवाल शुल्क में राहत का स्तर और उसकी समय-सीमा है। बिना आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुमान लगाना मुश्किल है, इसलिए यह रिपोर्ट केवल बयानों तक सीमित है।

दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ा निर्यातक संघों ने कहा है कि वे स्पष्टता का इंतज़ार कर रहे हैं; अनुबंध में देरी से ऑर्डर-निर्णय भी पीछे खिसक सकते हैं।

स्रोत: रॉयटर्स, न्यू इंडियन एक्सप्रेस, बाइलैटरल्स.ऑर्ग।